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Wednesday, April 8, 2026

सलूम्बर में फैली अज्ञात बीमारी पर बड़ा एक्शन, घर-घर सर्वे शुरू

राजस्थान के सलूम्बर जिले के लसाड़िया ब्लॉक के घाटा और लालपुरा गांवों में फैली अज्ञात बीमारी के कारण अब तक 7 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने "हाई अलर्ट" मोड पर बड़े पैमाने पर एक्शन शुरू कर दिया है। राजस्थान के सलूम्बर जिले में बच्चों की मौत के मामलों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर स्वास्थ्य अभियान शुरू किया है। इस मामले में अज्ञात बीमारी की जांच के लिए तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।


मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के निर्देश पर उदयपुर संभाग के सभी सात जिलों में निगरानी और रोकथाम अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर भी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। सरकार ने विशेषज्ञ टीमों का गठन किया है, जो बीमारी के कारणों की जांच कर रही हैं। साथ ही RNT Medical College की टीम और राज्य स्तरीय दल ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर इलाज और जांच व्यवस्था का आकलन किया।


स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 3,690 टीमों ने घर-घर जाकर सर्वे किया है और 52,000 से अधिक घरों को कवर किया गया है। इस दौरान 275 लोगों में बीमारी के लक्षण पाए गए, जिनमें से 25 को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में भेजा गया। इसके अलावा 13,000 से अधिक स्थानों पर जागरूकता अभियान भी चलाया गया, ताकि लोग सावधानी बरत सकें। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सलूम्बर के सेमारी गांव में 4 साल के एक बच्चे की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, 651 मरीजों को मौके पर ही इलाज दिया गया।


बीमारी को फैलने से रोकने के लिए मच्छरजनित रोगों के खिलाफ भी अभियान चलाया गया, जिसमें 2,557 स्थानों पर एंटी-लार्वा गतिविधियां की गईं। जांच के लिए 1,796 ब्लड स्लाइड तैयार किए गए और 94 सैंपल लैब में भेजे गए हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी को बुखार या अन्य लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें और सभी स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का पालन करें।


स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन और घर-घर सर्वे:

  • 3,690 टीमें तैनात: सरकार ने पूरे संभाग में 3,600 से अधिक टीमें तैनात की हैं।
  • 52,000 घरों का सर्वे: इन टीमों ने अब तक 52,000 से अधिक घरों का दरवाजा खटखटाकर स्वास्थ्य जांच की है।
  • 275 संदिग्ध मरीज मिले: सर्वे के दौरान बीमारी के लक्षण वाले 275 लोगों की पहचान की गई, जिनमें से 25 को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में भेजा गया है।
  • विशेषज्ञों की निगरानी: मुख्यमंत्री के निर्देश पर जयपुर और उदयपुर के विशेष डॉक्टरों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में डेरा डाले हुए हैं। 


बीमारी के मुख्य लक्षण और वर्तमान स्थिति:

  • लक्षण: प्रभावित बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, पेट दर्द, दस्त और शरीर में ऐंठन जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। बीमारी इतनी गंभीर है कि कुछ मामलों में 24 घंटे के भीतर ही बच्चे दम तोड़ रहे हैं।
  • प्रभावित आयु वर्ग: मरने वाले सभी बच्चों की उम्र मुख्य रूप से 2 से 4 वर्ष के बीच है।
  • जांच: शुरुआती सैंपल्स में कुछ सामान्य वायरस की रिपोर्ट नेगेटिव आई है, इसलिए बीमारी का सटीक कारण अभी भी "अज्ञात" बना हुआ है।
  • निवारक उपाय: प्रशासन द्वारा गांवों में फोगिंग, एंटी-लार्वा छिड़काव और लोगों को उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी आयुष शेट्टी ने शानदार प्रदर्शन, ली शी फेंग को हराया

बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप 2026 (Badminton Asia Championships 2026) वर्तमान में 7 से 12 अप्रैल, 2026 तक निंगबो (Ningbo), चीन में आयोजित की जा रही है। भारतीय खिलाड़ियों के लिए 8 अप्रैल 2026 का दिन मिला-जुला रहा, जिसमें आयुष शेट्टी ने बड़ा उलटफेर करते हुए दुनिया के 7वें नंबर के खिलाड़ी को हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।


भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी आयुष शेट्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए वर्ल्ड नंबर 7 ली शी फेंग को सीधे गेमों में हराकर बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप के दूसरे दौर में प्रवेश कर लिया।


आयुष ने 51 मिनट चले मुकाबले में 21-13, 21-16 से जीत दर्ज की। यह मुकाबला निंगबो ओलंपिक स्पोर्ट्स सेंटर में खेला गया। यह दोनों खिलाड़ियों के बीच पहला मुकाबला था। अब अगले दौर में आयुष का सामना वर्ल्ड नंबर 20 ची यू जेन से होगा।


यह पहली बार नहीं है जब वर्ल्ड नंबर 25 आयुष ने किसी उच्च रैंकिंग वाले खिलाड़ी को हराया हो। पिछले साल उन्होंने यूएस ओपन सेमीफाइनल में वर्ल्ड नंबर 6 चाउ टिएन-चेन को हराकर शानदार वापसी की थी और बाद में फाइनल में ब्रायन यांग को हराकर खिताब भी जीता था।


इससे पहले, भारत की शीर्ष मिक्स्ड डबल्स जोड़ी ध्रुव कपिला और तनिषा क्रास्टो ने भी अपने अभियान की जीत के साथ शुरुआत की। भारतीय जोड़ी ने थाईलैंड के फुवानत होरबानलुएकिट और बेन्यापा ऐमसार्ड को 21-14, 11-21, 21-15 से हराया।


अन्य मुकाबलों में, आशिथ सूर्या और अमृता प्रमुथेश को मलेशिया की जोड़ी वोंग टिएन सी और लिम च्यू सिएन से 21-16, 21-15 से हार का सामना करना पड़ा। वहीं रोहन कपूर और गड्डे रुथविका शिवानी की जोड़ी आठवीं वरीयता प्राप्त गोह सून हुआत और लाई शेवोन जेमी के खिलाफ 21-13, 21-19 से हारकर बाहर हो गई।


इस बीच, भारत के शीर्ष सिंगल्स खिलाड़ी पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन दिन में बाद में एक्शन में नजर आएंगे। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता सिंधु राउंड ऑफ 32 में मलेशिया की वोंग लिंग चिंग के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेंगी।


महिला सिंगल्स में भारत की अन्य खिलाड़ी उन्नति हुड्डा, मालविका बंसोड़ और तन्वी शर्मा भी मुख्य ड्रॉ में शामिल हैं और बुधवार को अपने मुकाबले शुरू करेंगी।


प्रमुख भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन (8 अप्रैल 2026)

  • आयुष शेट्टी: पुरुष एकल (जीत)- विश्व नंबर 7 चीन के ली शि फेंग  हराया।
  • पीवी सिंधु:  महिला एकल(जीत)- मलेशिया की वोंग लिंग चिंग को मात दी।
  • एचएस प्रणय: पुरुष एकल(जीत)- वियतनाम के गुयेन हाई डांग को हराकर अगले दौर में पहुंचे।
  • लक्ष्य सेन: पुरुष एकल(हार)-हांगकांग के ली चेउक यिउ  से हारकर बाहर हो गए।
  • किदांबी श्रीकांत: पुरुष एकल(हार)-सिंगापुर के लोह कीन येव से हार का सामना करना पड़ा।


बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप टूर्नामेंट की मुख्य बातें:

  • मेजबान: निंगबो ओलंपिक स्पोर्ट्स सेंटर, निंगबो, चीन।
  • पुरस्कार राशि: कुल $5,50,000 (लगभग ₹4.5 करोड़)।
  • प्रसारण: इस चैंपियनशिप के मैचों को बैडमिंटन एशिया के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर लाइव स्ट्रीम कर सकते हैं। 


इससे पहले फरवरी 2026 में बैडमिंटन एशिया टीम चैंपियनशिप हुई थी, जिसमें दक्षिण कोरिया की महिला टीम ने स्वर्ण पदक जीता था। 

Tuesday, April 7, 2026

अच्छा स्वास्थ्य ही मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है - राजस्व मंत्री

राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सीहोर जिले के इछावर सिविल अस्पताल में मानसरोवर मेडिकल कॉलेज द्वारा आयोजित निशुल्क स्वास्थ्य परामर्श शिविर का शुभारंभ किया। इस शिविर में विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा महिला रोग, हड्डी रोग, नेत्र और ईएनटी के मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें निःशुल्क दवाइयां बांटी गईं।


राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने इछावर सिविल हॉस्पिटल में मानसरोवर मेडिकल कॉलेज द्वारा आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श शिविर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आमजन को शिविर का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। मंत्री वर्मा ने कहा कि स्वस्थ समाज के लिए नियमित जांच जरूरी है, और प्रदेश सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है।


इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अच्छा स्वास्थ्य ही मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को सुलभ एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।


शिविर में महिला रोग, हड्डी रोग, शिशु रोग, नेत्र, ईएनटी सहित विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मरीजों का परीक्षण किया गया एवं परामर्श दिया गया। शिविर में कुल 384 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया। साथ ही ईसीजी, ब्लड प्रेशर एवं शुगर की जांच भी की गई। इस अवसर पर एसडीएम श्रीमती स्वाति मिश्रा, सीएमएचओ डॉ सुधीर डेहरिया, मानसरोवर ग्रुप के प्रो-चांसलर ईआर. गौरव तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, एवं अन्य सदस्य उपस्थित थे।


शिविर की मुख्य विशेषताएं:

  • आयोजक: मानसरोवर मेडिकल कॉलेज (सिविल अस्पताल, इछावर के सहयोग से)।
  • विशेषज्ञ सेवाएं: महिला रोग, हड्डी रोग, शिशु रोग, नेत्र एवं ईएनटी (ENT) जांच।
  • परीक्षण: ईसीजी (ECG), ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच की गई।
  • कुल लाभार्थी: लगभग 384 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ।
  • उद्देश्य: सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना।

Monday, April 6, 2026

पशुओं को खुरपका-मुंहपका रोग से बचाने के लिए किया गया टीकाकरण

वेटरनरी विभाग द्वारा जिले के ग्राम नीमटोन में पशुओं को खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) रोग से सुरक्षित रखने के लिए पशुओं का एफएमडी टीकाकरण किया गया तथा रोग की निगरानी के उद्देश्य से प्री-वैक्सीनेशन सैंपल भी एकत्रित किए गए। विभागीय टीम ने पशुपालकों को पशुओं के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और समय-समय पर टीकाकरण कराने की सलाह दी।


 क्या है खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) रोग

खुरपका-मुंहपका (FMD) पशुओं में होने वाला एक अत्यधिक संक्रामक और घातक विषाणु (वायरल) रोग है, जो मुख्य रूप से दो खुर वाले पशुओं जैसे गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर को प्रभावित करता है। यह 'पिकोरना' परिवार के 'एफथोनस' (Aphthovirus) विषाणु के कारण होता है।


प्रमुख लक्षण (Symptoms)

संक्रमित पशु में निम्न लक्षण दिखाई देते हैं:

  • तेज बुखार: पशु को 104°F से 106°F तक बुखार रहता है।
  • मुंह में छाले: जीभ, मसूड़ों और होठों पर फफोले या छाले पड़ जाते हैं, जिससे पशु को खाने-पीने में बहुत दर्द होता है।
  • लार टपकना: मुंह से लगातार अत्यधिक लार गिरती रहती है।
  • खुरों में घाव: खुरों के बीच में सूजन और घाव हो जाते हैं, जिससे पशु लंगड़ाकर चलने लगता है।
  • उत्पादन में कमी: दूध देने वाले पशुओं के दूध उत्पादन में भारी गिरावट आती है।
  • अन्य: थनों में सूजन, भूख न लगना, सुस्ती और गाभिन पशुओं में गर्भपात की स्थिति बन सकती है।


रोग फैलने के कारण (Causes of Spread)

यह बीमारी बहुत तेजी से फैलती है और इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • संक्रमित पशु के सीधे संपर्क में आने से।
  • दूषित चारा और पानी के सेवन से।
  • हवा के जरिए भी यह विषाणु फैल सकता है।
  • पशुओं के परिवहन वाहनों और उपकरणों के माध्यम से।


बचाव और नियंत्रण (Prevention & Control)

  • टीकाकरण (Vaccination): एफएमडी वैक्सीनेशन इस रोग से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है, जिससे पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और संक्रमण फैलने का खतरा कम होता है। बचाव का सबसे प्रभावी तरीका नियमित टीकाकरण है। सरकार द्वारा साल में दो बार (छह-छह महीने के अंतराल पर) टीकाकरण अभियान चलाया जाता है।
  • अलगाव (Isolation): बीमार पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए।
  • साफ-सफाई: पशुशाला में फिनाइल या डेटोल से सफाई करनी चाहिए और प्रभावित क्षेत्र में लोगों की आवाजाही कम रखनी चाहिए।
  • घरेलू उपचार: प्रभावित हिस्सों (मुंह और खुर) को लाल दवा (पोटेशियम परमैंगनेट) या नीम के काढ़े से धोना फायदेमंद होता है।


यह रोग इंसानों के स्वास्थ्य के लिए खतरा नहीं है, लेकिन यह पशुपालन अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाता है।

Friday, April 3, 2026

राज्यस्तरीय खेलवृत्ति के लिए करें आवेदन: स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक के खिलाड़ियों को मिलेगी छात्रवृत्ति

संचालनालय खेल और युवा कल्याण, मध्य प्रदेश द्वारा 01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच अधिकृत राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के पदक विजेता खिलाड़ियों से वर्ष 2026 के लिए छात्रवृत्ति हेतु आवेदन आमंत्रित हैं।


प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण, संचालनालय  द्वारा वर्ष 2025 की राज्य स्तरीय खेलवृत्ति के लिए जिले के प्रतिभावान खिलाड़ियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह खेलवृत्ति उन खिलाड़ियों को प्रदान की जाएगी, जिन्होंने 01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के मध्य आयोजित अधिकृत राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक अर्जित किए हैं।


निर्धारित प्रावधानों के अनुसार स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को 10 हजार रुपए रजत पदक विजेताओं को 8 हजार रुपए तथा कांस्य पदक विजेताओं को 6 हजार रुपए की खेलवृत्ति राशि प्रदान की जाएगी।


जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि पात्रता धारी इच्छुक खिलाड़ी अपने आवेदन पत्र 31 मई 2026 तक कार्यालय जिला खेल परिसर  में जमा कर सकते हैं। आवेदन पत्र एवं संबंधित दिशा-निर्देश कार्यदिवसों में कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं।


उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम तिथि के पश्चात प्राप्त होने वाले आवेदनों पर किसी भी प्रकार से विचार नहीं किया जाएगा, अतः पात्र खिलाड़ी समय सीमा का विशेष ध्यान रखें।


विशेष प्रावधान:

  • यह राशि मान्यता प्राप्त राज्य खेल संघों द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं के लिए है।
  • जिन खिलाड़ियों को पूर्व में दो बार यह खेलवृत्ति मिल चुकी है, वे पात्र नहीं हैं।


खेलवृत्ति से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश एवं नियमावली विभाग की आधिकारिक वेबसाइट संचालनालय खेल एवं युवा कल्याण मध्यप्रदेश पर भी उपलब्ध हैं।


प्रमुख विवरण:

  • अंतिम तिथि: 31 मई 2026
  • पात्रता: 19 वर्ष से कम आयु (1 अप्रैल 2026 तक)।
  • आवेदन स्थल: जिला खेल और युवा कल्याण अधिकारी कार्यालय।
  • दस्तावेज़: मूल निवास, पदक प्रमाण पत्र (सत्यापित), 10वीं/जन्म प्रमाण पत्र, आधार, बैंक पासबुक।
  • वेबसाइट: dsywmp.gov.in पर अधिक जानकारी उपलब्ध है।

Thursday, April 2, 2026

प्रार्थना भोई का राष्ट्रीय सेलिंग कैंप में चयन, देश के श्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण का मिला मौका

जिला खेल परिसर, स्टेडियम विदिशा की प्रतिभावान खिलाड़ी कु. प्रार्थना भोई ने वाटर स्पोर्ट्स (सेलिंग) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उन्होंने 18 से 21 मार्च 2026 तक गोवा में आयोजित सेलिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। विदिशा की प्रार्थना भोई एक उभरती हुई भारतीय एथलीट हैं, जिन्होंने सेलिंग (Sailing) के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।


जिला खेल अधिकारी श्री प्रदीप सिंह रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रार्थना भोई वर्तमान में वाटर स्पोर्ट्स अकादमी भोपाल में रहकर प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। उनके निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन आगामी 3 अप्रैल 2026 से गोवा में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय सेलिंग टीम के प्रशिक्षण कैंप के लिए किया गया है।


राष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने के लिए प्रार्थना भोई गोवा के लिए रवाना हो रही हैं, जहां वे देश के श्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी। उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर जिला खेल परिसर, विदिशा के समस्त प्रशिक्षकों एवं खिलाड़ियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।


प्रार्थना भोई के बारे में कुछ मुख्य जानकारियां 

  • दोहरा कौशल: प्रार्थना मूल रूप से कुश्ती की खिलाड़ी थीं, लेकिन लगभग एक साल पहले उन्होंने मध्य प्रदेश राज्य सेलिंग अकादमी (भोपाल) जॉइन की और सेलिंग की दुनिया में कदम रखा।
  • स्वर्ण पदक विजेता: उन्होंने चेन्नई में आयोजित ऑल इंडिया विंड सर्फिंग चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर इतिहास रचा है।
  • राष्ट्रीय चयन: हाल ही में फरवरी 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण उनका चयन राष्ट्रीय सेलिंग कैंप के लिए भी हुआ है।
  • उपलब्धि: अपनी मेहनत और छोटी उम्र में ही उन्होंने सेलिंग जैसे चुनौतीपूर्ण खेल में राष्ट्रीय स्तर पर जिले और प्रदेश का मान बढ़ाया है।

Monday, March 30, 2026

भारत की शीतल देवी को चुना गया ‘पैरा आर्चर ऑफ द ईयर’

भारत की शीतल देवी को विश्‍व तीरंदाजी ने वर्ष 2025 का सर्वश्रेष्ठ पैरा तीरंदाज चुना है। जम्मू-कश्मीर की 19 वर्षीय शीतल देवी पिछले साल दक्षिण कोरिया के ग्वांगझू में आयोजित विश्‍व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में महिला कंपाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली और एकमात्र बिना बाजू वाली तीरंदाज बनीं।


शीतल देवी को वर्ल्ड आर्चरी ने ‘पैरा आर्चर ऑफ द ईयर’ चुना है, जिसके बाद भारतीय तीरंदाज ने दिल से आभार जताया है। वैश्विक शासी निकाय ने पिछले एक साल में इस खेल में उनके बेहतरीन प्रदर्शन और योगदान के लिए शीतल देवी को इस खिताब से सम्मानित किया है।


शीतल देवी का यह पुरस्कार एक ऐतिहासिक सीजन की शानदार परिणति है, जिसमें उन्होंने ग्वांगजू में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा चैंपियनशिप में अपना पहला विश्व खिताब जीता था। वह बिना हाथों के पैरा आर्चरी विश्व चैंपियनशिप जीतने वाली पहली महिला बनी, उन्होंने कंपाउंड महिला व्यक्तिगत फाइनल में पैरालंपिक चैंपियन ओज्नुर क्यूर गिर्दी को हराया। इसके अलावा, उन्होंने महिला टीम स्पर्धा में रजत और मिश्रित टीम प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता।


शीतल देवी साल 2025 में ‘बीबीसी इमर्जिंग एथलीट ऑफ द ईयर’ पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय तीरंदाज बनीं। यह सम्मान उन्हें पेरिस 2024 पैरालंपिक गेम्स में राकेश कुमार के साथ मिश्रित टीम में कांस्य पदक जीतने के बाद मिला। देवी को 2023 में ‘वर्ल्ड आर्चरी पैरा वुमन ऑफ द ईयर’ और एशियाई पैरालंपिक समिति की सर्वश्रेष्ठ युवा एथलीट के रूप में भी मान्यता मिली है। साल 2024 में उन्हें ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।


अपने करियर में एक और माइलस्टोन जोड़ते हुए, शीतल देवी ने दिसंबर में इतिहास रच दिया। उन्हें जेद्दा में होने वाले एशिया कप के लिए भारत की ‘एबल-बॉडीड’ (शारीरिक रूप से सक्षम) कंपाउंड आर्चरी टीम में चुना गया, जो उनके असाधारण कौशल और बहुमुखी प्रतिभा को और भी अधिक रेखांकित करता है।


शीतल देवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पैरा तीरंदाजों के साथ नामित होना और अब वर्ल्ड आर्चरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ पैरा तीरंदाज चुना जाना, यह एहसास बहुत ही खास है। मेरा दिल आभार, भावनाओं और इस सफर में मिली हर चीज से भरा हुआ है। धन्यवाद।”


फोकोमेलिया (जन्मजात शारीरिक विकार) के साथ जन्मी देवी बिना हाथों के एक अनोखी तकनीक का इस्तेमाल करके प्रतिस्पर्धा करती हैं। यह तरीका अपनी मौलिकता और सटीकता के कारण दुनिया भर का ध्यान खींच चुका है।


उनके पदकों की झोली में कई बड़े टूर्नामेंट्स शामिल हैं, जिनमें एशियन चैंपियनशिप, एशियन पैरा गेम्स, वर्ल्ड चैंपियनशिप और पैरालंपिक गेम्स शामिल हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनके बढ़ते कद को उजागर करते हैं।

Saturday, March 28, 2026

अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी: अपनाएं सरल उपाय, रहें सुरक्षित

जिला प्रशासन द्वारा अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी पर बल देते हुए बचाव के उपायों पर आधारित सुझावों का पालन करने का आह्वान करते हुए अपनाएं सरल उपाय, रहें सुरक्षित को रेखांकित किया गया है।


सामान्यतः गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि देखी जाती है, जिससे जन-धन की हानि का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के लिए जागरूकता और सावधानी अत्यंत आवश्यक है। यदि कुछ सरल उपायों को अपनाया जाए तो आग लगने की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।


घर एवं दैनिक जीवन में सावधानियां:

घर में बिजली की खराब या पुरानी वायरिंग को समय-समय पर ठीक करवाना जरूरी है। गैस सिलेंडर को हमेशा सीधा रखें और किसी भी प्रकार का लीकेज होने पर तुरंत गैस बंद करें। खाना बनाते समय गैस या चूल्हे को बिना निगरानी के न छोड़ें और रसोई में आग जलती छोड़कर कहीं न जाएं।


घर में एक छोटा फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) अवश्य रखें और उसके उपयोग की जानकारी भी रखें। पेट्रोल, केरोसीन जैसे ज्वलनशील पदार्थों को सुरक्षित स्थान पर रखें। बच्चों को माचिस और लाइटर से दूर रखना भी अत्यंत आवश्यक है।


खेतों में अग्नि सुरक्षा के उपाय:

खेतों में आग से बचाव के लिए चारों ओर 8–10 फीट चौड़ी खाली पट्टी (फायर लाइन) बनाना अत्यंत जरूरी है, जिससे आग को फैलने से रोका जा सके। सूखी घास, पत्ते और कचरा खेत में इकट्ठा न होने दें।


पराली या फसल अवशेष जलाने से आग फैलने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए इसे न जलाएं। खेतों के पास बिजली के ढीले या टूटे तार न हों और उनसे उचित दूरी बनाए रखें। पास में पानी, मिट्टी या बाल्टी की व्यवस्था रखें ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत आग बुझाई जा सके। खेतों में जलती हुई बीड़ी या सिगरेट न फेंके।


आपात स्थिति में क्या करें:

यदि आग लग जाए तो तुरंत 101 (फायर ब्रिगेड) पर सूचना दें। गैस और बिजली के कनेक्शन तुरंत बंद करें। छोटी आग को पानी, मिट्टी या कंबल से बुझाने का प्रयास करें, जबकि बड़ी आग की स्थिति में सुरक्षित दूरी बनाए रखें और विशेषज्ञ सहायता का इंतजार करें।


बच्चों के लिए विशेष सावधानी:

बच्चों को माचिस और लाइटर से खेलने से रोकें और उन्हें आग के खतरों के प्रति जागरूक करें। घर में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) सुनिश्चित करें और बाहर निकलने का रास्ता हमेशा साफ और खुला रखें।


अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा उपाय है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर हम स्वयं, अपने परिवार और अपनी फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं।

Thursday, March 19, 2026

गर्मी में हाइपरटेंशन बन सकता है जानलेवा, इन बातों का रखें ध्यान?

हर बढ़ते दिन के साथ गर्मी का पारा ऊपर जाने लगा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सेहत की चुनौतियां बढ़ेंगी, खासकर ब्लडप्रेशर को लेकर सतर्क रहने की जरूरत होगी। गर्मी के दिनों में रक्तचाप और हृदय से जुड़े किस तरह के हो सकते हैं जोखिम, बचाव के लिए किन बातों का रखना है ध्यान?


हृदय से जुड़ी समस्या अब हर उम्र में हो रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-2021) के अनुसार भारत में 15 से 54 वर्ष के आयु वर्ग में हर पांच में से लगभग एक व्यक्ति को हाइपरटेंशन है। क्या आप जानते हैं कि बढ़ता तापमान न केवल जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर सकता है, बल्कि यह चुपके से हदय के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है? इसलिए आने वाले दिनों में पारा बढ़ने पर कैसी होनी चाहिए आपकी तैयारी, यही समय है कि हम यह अच्छी तरह समझ लें। हालांकि हमारा शरीर मौसम के अनुकूल स्वयं ही बदलाव करने में माहिर होता है, पर उचित सावधानी न रखी जाए तो बड़ी मुसीबत पी बन सकती है। 


वास्तव में पारा बढ़ने पर रक्तवाहिकाएं शरीर को ठंडा यानी सामान्य तापमान में लाने के प्रयास में जुट जाती हैं। इस प्रक्रिया में रक्तचाप में उत्तार-चढ़ाव होता है और शरीर से पसीना भी अधिक निकलता है। यही वह चीज है, जिसका गर्मी के मौसम में सर्वाधिक ध्यान रखना चाहिए। दरअसल, पसीना निकलने से शरीर में पानी की कमी या डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है, जिससे बचना है। अन्यथा रक्तचाप सामान्य से बहुत कम होने से नसों में थक्के जमने की आशंका रहती है। हृदय को रक्त पंप करने में समस्या आती है, उस पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जो आपतकालको स्थिति यानी हार्ट अटैक या स्ट्रोक की स्थिति भी उत्पन्न कर सकता है।


गर्मी में हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) के मरीजों को डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, कमजोरी, और हीट स्ट्रोक का अधिक खतरा होता है। अत्यधिक गर्मी के कारण रक्त वाहिकाएं फैलने से बीपी में अचानक गिरावट या वृद्धि हो सकती है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और दिल का दौरा या किडनी की समस्या का जोखिम बढ़ जाता है।


एसी के बिना रहने की आदत डालें

गर्मी शुरू होते ही घर से लेकर दफ्तर तक सब जगह एसी चलाया जाने लगता है। कुछ लोग एसी का मान बहुत कम रखना पसंद करते हैं। अगर रक्तचाप की समस्या है तो ऐसा करने से बचना चाहिए। अगर लंबे समय तक एयरकंडीशनर में काम-काज करना पड़े तो प्रयास करें कि इसे एक सामान्य तापमान 24 डिग्री सेल्सियस पर ही सेंट करें। बता दें कि अधिक कूलिंग रखने से आपको प्यास कम लग सकती है। इससे डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है। शरीर का पसीना बाहर नहीं निकालने से शरीर में सोडियम यानी नमक बना रहता है। यह हृदयरोगियों के लिए काफी जोखिम भरा हो सकता है। एसी में निरंतर रहने के आदी होने से आप शारीरिक गतिविधि भी कम करने लगते हैं या इससे बचना चाहते हैं। साथ ही यह गर्मी सहने की क्षमता को कम करने के साथ हृदय की सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकता है।


गर्मी में हाइपरटेंशन मरीजों के लिए प्रमुख जोखिम 

  • डिहाइड्रेशन और बीपी का उतार-चढ़ाव: पसीने के माध्यम से शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है, जो रक्तचाप (BP) को अस्थिर कर सकता है।
  • हृदय पर अतिरिक्त बोझ: शरीर को ठंडा रखने के लिए हृदय को सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जो दिल का दौरा या अनियमित धड़कन का कारण बन सकता है।
  • दवाओं का प्रभाव: उच्च रक्तचाप की कुछ दवाएं (जैसे मूत्रवर्धक या डाययुरेटिक्स) गर्मी में निर्जलीकरण (dehydration) के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।


उच्च रक्तचाप और हाइपरटेंशन

सामान्य रक्तचाप 120/80 होना चाहिए पर हाइपरटेंशन है तो यह 140/90 के आसपास रहता है। एक रीडिंग में उच्च रक्तचाप है तो यह हाइपरटेंशन हो आवश्यक नहीं। सात दिन लगातार मापने के बाद यदि तीन दिन या इससे अधिक समय तक उच्च रक्तचाप रहे तो आप इसकी चपेट में हो सकते हैं। 


हाइपरटेंशन है छिपा हुआ खतरा 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के ग्लोबल रिपोर्ट आन हाइपरटेंशन 2025 के अनुसार, वैश्विक आबादी का तकरीबन 34 प्रतिशत हिस्सा हाइपरटेंशन से पीड़ित है। भारत में 21 करोड़ से ज्यादा वयस्क हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं। इनमें से 17 करोड़ का रक्तचाप अनियंत्रित रहता है।


डिहाइड्रेशन से बचें

शरीर के तापमान को स्थिर बनाने के लिए पानी जरूरी है। इससे हार्ट को काम करने में आसानी होती है। गर्मी के दिनों में खूब पसीना निकलता है। इसे संतुलित रखने के लिए नींबू पानी, पुदीने और खीरे के पानी का उपयोग भी कर सकते हैं। ओआरएस का घोल भी ले सकते हैं।


रक्तचाप की जांच: बचाव का बेहतर उपाय

सर्दी में हृदयरोगियों को सावधानी बरतनी होती है तो गर्मी में भी अलग तरह की दिक्कत होती है। इसमें सबसे आम है रक्तचाप का कम होना। इसके लिए आपको पानी खूब पीना चाहिए। शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। नियमित रक्तचाप जांच कराएं ताकि उसे नियंत्रण में रखने में आसानी हो। यदि हाइपरटेंशन है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह एक छुपा हुआ जोखिम है, जो लापरवाही से आपको गंभीर हृदयरोग की स्थिति में पहुंचा सकता है।


डाक्टर की सलाह से ही दवाइयां कम करें

गर्मी में ऐसी जगहों पर जाने से परहेज करें जहां अधिक गर्मी और घुटन हो या पसीना आने के साथ लंबे समय तक खड़े रहना पड़े। अक्‍सर देखा गया है कि ऐसे में बीपी Low हो जाता है और लोग बेहोश हो जाते हैं। वहीं, यदि आप हृदयरोग से जुड़ी समस्याओं की दवाइयां ले रहे हैं तो यह भी रक्तचाप को कम कर सकती हैं। दरअसल, इन दवाइयों का काम ही होता है आपके शरीर के अतिरिक्त द्रव को निकालना या रक्तचाप कम करना, लेकिन स्वयं से दवाइयां कम न करें। चिकित्सक से ही पता चलेगा कि आपकी वास्तविक स्थिति क्या है और कौन सी व कितनी दवा कम करनी है।


खानपान में रखें ध्यान

  • सोडियम की मात्रा, अम्ल और क्षार का संतुलन और कोशिकाओं के सामान्य कार्य के लिए जरूरी है, लेकिन इसकी अधिकता रक्तचाप बढ़ा सकती है।
  • फलों व सब्जियों में पोटेशियम पर्याप्त होता है, हृदय की सेहत के लिए यह जरूरी है।
  • ताजे फल व सब्जियों का सेवन करें। साबुत अनाज और फलियों का सेवन अच्छा है।
  • मोटें अनाज जो इस मौसम के अनुकूल है, जैसे जौ, रागी आदि का सेवन करें।
  • अधिक ठंडे खाद्य पदार्थ के सेवन से परेशानी महसूस कर सकते हैं, उसे सामान्य करें।
  • घी, सरसों तेल अच्छे माने गए है, पर इनका सेवन भी सीमित करना चाहिए।
  • जंक व मसालेदार खाने को ना कहे। डिब्बाबंद खाना भी आपके लिए सही नहीं है।
  • वजन कम करने के लिए खाना छोडने जैसे अचानक बदलाव घातक प्रभाव डाल सकते है।


गर्मी में हाइपरटेंशन मरीजों के लिए प्रमुख सावधानियां

  • भरपूर पानी पिएं: शरीर में पानी की कमी न होने दें, भले ही प्यास न लगे।
  • धूप से बचें: अत्यधिक गर्मी या बढ़े हुए तापमान में बाहर जाने से बचें। सुबह 11 बजे से दोपहर 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। 
  • बीपी चेक करें: अपना ब्लड प्रेशर नियमित रूप से मॉनिटर करते रहें।
  • खान-पान: कैफीन, शराब और मीठे पेय पदार्थों से बचें।
  • हल्के कपड़े पहनें: सूती और ढीले कपड़े पहनें। सूती व आरामदायक वस्त्र का चयन करे ताकि शरीर को ठंडा रहने में मदद मिले।
  • शारीरिक गतिविधि: कसरत व शारीरिक गतिविधि करते रहे। स्वस्थ तनाव प्रबंधन के तरीके जानें।


इनका भी रहे ध्यान

यदि चक्कर आना, सिरदर्द, या जी मिचलाने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत किसी ठंडी जगह पर जाएं और डॉक्टर से सलाह लें। 


Note: इसका मकसद सिर्फ़ जानकारी देना है। स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह या जांच के लिए, किसी पेशेवर डॉक्टर से बात करें।

Saturday, March 14, 2026

मंत्री श्री विश्वास सारंग ने किया फिट इंडिया कार्निवाल का शुभारंभ

Bhopal: सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने शनिवार को टीटी नगर स्टेडियम, भोपाल में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के भोपाल शाखा द्वारा आयोजित दो दिवसीय फिट इंडिया कार्निवाल का शुभारंभ किया। शुभारंभ में पारंपरिक खेल मलखंभ और सांस्कृतिक नृत्यों की भव्य प्रस्तुति दी गई। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही किसी व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। जब नागरिक स्वस्थ और सक्रिय रहते हैं, तब देश विकास और प्रगति के नए शिखरों को स्पर्श करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया फिट इंडिया मूवमेंट आज पूरे देश में जन आंदोलन का रूप ले चुका है। एक घंटा, खेल के मैदान में ऐसे अभियानों के माध्यम से समाज के हर आयु वर्ग के लोग फिटनेस को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि यह कार्निवाल भी उसी संकल्प का सशक्त उदाहरण है जहाँ विभिन्न खेल एवं फिटनेस गतिविधियों के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।


खेल विभाग के सतत प्रयास- मंत्री श्री सारंग ने बताया कि प्रदेश में खेल और फिटनेस संस्कृति को मजबूत करने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें खेलो एमपी यूथ गेम्स, हर विधानसभा में खेल परिसर, पार्थ योजना, फिट इंडिया क्लब, मध्यप्रदेश युवा प्रेरक अभियान और युवा उत्सव जैसी योजनाएँ शामिल हैं, जिनके माध्यम से युवाओं को खेलों से जोड़ते हुए स्वस्थ और अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।


खुद फिट रहें और परिवार को भी करें प्रेरित- मंत्री श्री सारंग ने सभी नागरिकों से आह्वान किया है कि फिटनेस को केवल व्यक्तिगत आदत न बनाकर पारिवारिक संस्कृति बनाएं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को नियमित व्यायाम, योग और खेल गतिविधियों से जोड़ें जिससे समाज में स्वस्थ और सकारात्मक वातावरण का निर्माण हो सके।


युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति- मंत्री श्री सारंग ने कहा कि जब देश का युवा स्वस्थ, अनुशासित और ऊर्जावान होता है, तब राष्ट्र प्रगति के नए कीर्तिमान स्थापित करता है। फिट और जागरूक युवा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे।

Wednesday, March 11, 2026

ICC T20 Rankings: क्या है टी-20 रैंकिंग, जानिए दुनिया का नंबर-1 टी20 बल्लेबाज, गेंदबाज और ऑलराउंडर

ICC T20 Rankings: टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बाद ICC ने ताजा टी20 इंटरनेशनल रैंकिंग जारी कर दी है। नई रैंकिंग में बल्लेबाजी, गेंदबाजी और ऑलराउंडर तीनों कैटेगरी में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। खास बात यह है कि बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा नजर आ रहा है। टी20 वर्ल्डकप के बाद ICC की ताजा टी20 रैंकिंग में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला है। बल्लेबाजी में अभिषेक शर्मा नंबर 1 पर पहुंच गए हैं, जबकि गेंदबाजी में वरुण चक्रवर्ती शीर्ष स्थान पर हैं।


बल्लेबाजी रैंकिंग में अभिषेक शर्मा टॉप पर

आईसीसी की ताजा टी20 बल्लेबाजी रैंकिंग में अभिषेक शर्मा पहले स्थान पर पहुंच गए हैं। उनके खाते में 874 रेटिंग पॉइंट्स हैं और शानदार फॉर्म की बदौलत उन्होंने दुनिया के कई बड़े बल्लेबाजों को पीछे छोड़ दिया है। दूसरे स्थान पर साहिबजादा फरहान हैं, जिनके 848 रेटिंग पॉइंट्स हैं। वहीं इंग्लैंड के फिस सॉल्ट 803 पॉइंट्स के साथ तीसरे नंबर पर मौजूद हैं।  भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन भी टॉप-5 में जगह बनाने में सफल रहे हैं। वह 783 रेटिंग पॉइंट्स के साथ चौथे स्थान पर हैं। इसके अलावा श्रीलंका के पथुम निसांका पांचवें नंबर पर हैं। टॉप-10 में भारत के और भी खिलाड़ी शामिल हैं। तिलक वर्मा छठे और सूर्यकुमार यादव सातवें स्थान पर मौजूद हैं। वहीं साउथ अफ्रीका के डिवॉल्ड ब्रेविस 8वें नंबर पर हैं। इंग्लैंड के जोस बटलर नौवें और न्यूजीलैंड के टिम सीफर्ट 10वें स्थान पर हैं। 


गेंदबाजी में वरुण चक्रवर्ती नंबर 1

गेंदबाजी रैंकिंग की बात करें तो भारत के स्पिनर वरुण चक्रवर्ती  771 रेटिंग पॉइंट्स के साथ दुनिया के नंबर 1 टी20 गेंदबाज बन गए हैं। दूसरे स्थान पर अफगानिस्तान के स्टार स्पिनर राशिद खान हैं, जिनके 753 पॉइंट्स हैं। पाकिस्तान के अबरार अहमद तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं साउथ अफ्रीका के कॉर्बिन बॉश चौथे, इंग्लैंड के अनुभवी स्पिनर आदिल राशिद पांचवें और ऑस्ट्रेलिया के एडम जम्पा छठे स्थान पर हैं। भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह भी टॉप-10 में शामिल हैं और वह सातवें स्थान पर काबिज हैं। उनकी शानदार गेंदबाजी ने टी20 वर्ल्ड कप में भी टीम इंडिया की जीत में अहम भूमिका निभाई थी।


ऑलराउंडर रैंकिंग में सिकंदर रजा शीर्ष पर

ऑलराउंडर रैंकिंग में जिम्बाब्वे के स्टार खिलाड़ी सिकंदर रजा पहले स्थान पर हैं और उनके 328 रेटिंग पॉइंट्स हैं। भारत के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या 284 पॉइंट्स के साथ दूसरे नंबर पर मौजूद हैं। पाकिस्तान के युवा खिलाड़ी साइम अयूब तीसरे स्थान पर हैं। इसके अलावा भारत के शिवम दुबे भी टॉप-10 ऑलराउंडर की सूची में शामिल हैं और वह नौवें नंबर पर हैं।


भारतीय खिलाड़ियों का दिखा दबदबा

नई आईसीसी टी20 रैंकिंग में भारतीय खिलाड़ियों की मजबूत मौजूदगी साफ दिखाई देती है। बल्लेबाजी, गेंदबाजी और ऑलराउंडर तीनों कैटेगरी में भारत के कई खिलाड़ी टॉप-10 में शामिल हैं, जो टीम की मौजूदा मजबूत स्थिति को दर्शाता है। 

Tuesday, March 10, 2026

संक्रमण और थकान हो सकते हैं Aplastic Anemia के संकेत

एप्लास्टिक एनीमिया एक दुर्लभ और गंभीर ब्लड डिसऑर्डर है, जिसमें बोन मैरो पर्याप्त मात्रा में रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स का निर्माण नहीं कर पाता। भारत में हर साल कई लोगों की मृत्यु एप्लास्टिक एनीमिया के कारण होती है। कई मरीजों में इसका सही कारण पता नहीं चल पाता, लेकिन यह स्थिति ऑटोइम्यून डिसऑर्डर्स, वायरल इंफेक्शन्स और कुछ टॉक्सिक सब्सटेंसेस, केमिकल्स और रेडिएशन के कॉन्टैक्ट से जुड़ी हो सकती है।


कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक हीमेटो-ऑन्कोलॉजी एवं बीएमटी, के अनुसार बोन मैरो शरीर का ब्लड सेल बनाने वाला मुख्य केंद्र होता है। जब यह केंद्र धीमा पड़ जाता है या काम करना बंद कर देता है, तो इसके परिणाम जानलेवा हो सकते हैं। मरीज बार-बार इंफेक्शन, अत्यधिक थकान और अनकंट्रोल्ड ब्लीडिंग के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। हालांकि एप्लास्टिक एनीमिया एक गंभीर डिसऑर्डर है, लेकिन इसके प्रभावी इलाज उपलब्ध हैं। कई योग्य मरीजों के लिए ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट एक संभावित इलाज और जीवन का दूसरा अवसर दे सकता है।


भारतीय आंकड़े बताते हैं कि बोन मैरो फेल्योर सिंड्रोम में एप्लास्टिक एनीमिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई मरीज डॉक्टर के पास तब पहुंचते हैं जब लैबोरेटरी रिपोर्ट में पैनसाइटोपेनिया पाया जाता है, यानी शरीर में रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स की कमी। इंडियन जर्नल ऑफ हेमेटोलॉजी एंड ब्लड ट्रांसफ्यूजन में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि भारत में बोन मैरो फेल्योर के मामलों का बड़ा हिस्सा एप्लास्टिक एनीमिया के कारण होता है।


रिकॉर्ड के अनुसार, भारत में मरीज पश्चिमी देशों की तुलना में कम उम्र में ही बीमारी के लक्षण दिखाने लगते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जागरूकता और समय पर पहचान कितनी आवश्यक है।


एप्लास्टिक एनीमिया में क्या होता है?


एक सामान्य शरीर में बोन मैरो लगातार रेड ब्लड सेल्स बनाता है, जो शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाते हैं; व्हाइट ब्लड सेल्स, जो इंफेक्शन्स से लड़ते हैं; और प्लेटलेट्स, जो ब्लीडिंग रोकते हैं। एप्लास्टिक एनीमिया में यह निर्माण प्रक्रिया रुक जाती है। अधिकतर मामलों में इम्यून सिस्टम ब्लड बनाने वाली स्टेम सेल्स पर हमला कर उन्हें नष्ट कर देता है, जो रक्त के सभी कंपोनेंट्स के निर्माण के लिए जिम्मेदार होती हैं।


जैसे-जैसे ब्लड सेल्स की संख्या घटती है, लक्षण दिखाई देने लगते हैं। हीमोग्लोबिन कम होने से लगातार थकान, कमजोरी, हल्का काम करने पर भी सांस फूलना और पीलापन दिखाई देता है। व्हाइट ब्लड सेल्स की कमी से मरीज बार-बार या गंभीर इंफेक्शन के शिकार हो जाते हैं। प्लेटलेट्स कम होने से आसानी से चोट लगना, मसूड़ों या नाक से ब्लीडिंग होना, छोटे कट पर भी देर तक ब्लीडिंग रहना और त्वचा पर नीले निशान पड़ना जैसे लक्षण दिखते हैं।


डॉक्टर हीमोग्लोबिन, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स की कमी की इस स्थिति को पैनसाइटोपेनिया कहते हैं। समय पर कम्प्लीट ब्लड काउंट और आवश्यकता होने पर बोन मैरो जांच कर सही डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट शुरू करना बहुत जरूरी है।


क्या इसका उपचार संभव है?


हाँ। इलाज का चुनाव बीमारी की गंभीरता, मरीज की उम्र और उसकी हेल्थ कंडीशन पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे ब्लड सेल्स की संख्या बढ़ सकती है। लेकिन कई मरीजों, खासकर गंभीर रूप से प्रभावित युवाओं के लिए, ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट सबसे प्रभावी और आशाजनक ट्रीटमेंट हो सकता है।


ट्रांसप्लांट की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि डोनर का एचएलए प्रोफाइल मरीज से कितना मैच करता है। डॉक्टर 10/10 एचएलए मैच की तलाश करते हैं, जिससे कॉम्प्लिकेशन्स कम हों और रिजल्ट बेहतर मिलें। दुर्भाग्य से, परिवार में उपयुक्त मैच केवल लगभग 30 प्रतिशत मरीजों को ही मिल पाता है। बाकी 70 प्रतिशत मरीज नेशनल या इंटरनेशनल रजिस्ट्रियों में दर्ज अनरिलेटेड डोनर्स पर निर्भर रहते हैं।


भारत में रजिस्टर्ड ब्लड स्टेम सेल डोनर्स की संख्या अभी कम है जिसके कारण मरीजों के लिए ट्रांसप्लांट तक पहुंच काफी सीमित हो जाती है।


गलत जानकारी डोनर रजिस्ट्रेशन में बड़ी बाधा है। दर्द, लंबे समय तक हेल्थ पर असर या फर्टिलिटी पर प्रभाव जैसी गलत धारणाएं लोगों को हतोत्साहित करती हैं। वास्तव में, ब्लड स्टेम सेल डोनेशन एक सुरक्षित और वॉलंटरी प्रक्रिया है और ज्यादातर मामलों में प्लेटलेट्स डोनेशन के समान होती है।


एप्लास्टिक एनीमिया के मैनेजमेंट के लिए सरकारी सपोर्ट, डोनर रजिस्ट्रेशन कैंपेन और डोनर पूल बढ़ाने की आवश्यकता है। बार-बार इंफेक्शन, अत्यधिक थकान, बिना कारण ब्लीडिंग और नीले निशान जैसे लक्षणों की समय पर पहचान से जल्दी डायग्नोसिस और रेफरल संभव है। साथ ही, डोनर बेस मजबूत करने से पूरे भारत में हजारों मरीजों को जीवनदान दिया जा सकता है।

Sunday, March 8, 2026

Women's day 2026 special: 30 की उम्र के महिलाएं रहें सावधान हो सकती साइलेंट बोन लॉस की समस्या, इसे नजरअंदाज न करें?

30 की उम्र के बाद कई महिलाओं में साइलेंट बोन लॉस की समस्या शुरू हो सकती है, जिसे ऑस्टियोपोरोसिस भी कहा जाता है। यह बीमारी शुरुआती दौर में बिना लक्षण के बढ़ती है। सही डाइट, नियमित एक्सरसाइज और समय पर जांच से हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ रखा जा सकता है।


अक्सर महिलाएं अपनी फैमिली की हेल्थ का ध्यान रखती हैं, लेकिन अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं को कई सारी समस्याएं होने लगती 30 की उम्र के बाद अधिकतर महिलाओं में साइलेंट बोन लॉस की समस्या शुरू हो जाती है।


क्या होती है साइलेंट बोन लॉस समस्या?

साइलेंट बोन लॉस, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) कहा जाता है, हड्डियों की एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर और खोखली होती जाती हैं। इसे 'साइलेंट' या 'मौन' इसलिए कहा जाता है क्योंकि शुरुआती अवस्था में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते और अक्सर इसका पता तब चलता है जब मामूली चोट या गिरने से हड्डी टूट (फ्रैक्चर) जाती है।


साइलेंट बोन लॉस समस्या के मुख्य कारण और जोखिम कारक

  • कैल्शियम और विटामिन D की कमी: आहार में इन पोषक तत्वों की कमी हड्डियों के घनत्व को कम कर देती है।
  • उम्र और जेंडर: 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और विशेषकर पोस्टमेनोपॉजल महिलाओं (30 की उम्र के बाद भी जोखिम शुरू हो सकता है) में यह समस्या अधिक देखी जाती है।
  • जीवनशैली: शारीरिक सक्रियता की कमी, धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन और खराब खान-पान।
  • दवाएं और बीमारियां: स्टेरॉयड का लंबे समय तक उपयोग, थायराइड की समस्या, और डायबिटीज जैसी स्थितियां।


महिलाओं में कब से शुरू होती है साइलेंट बोन लॉस की समस्या

एक्सपर्ट के अनुसार, कई महिलाओं में 30 की उम्र के बाद धीरे-धीरे हड्डियों की डेंसिटी कम होने लगती है। इस स्थिति को ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। इसके अलावा इसे साइलेंट डिजीज भी कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण शुरुआती दौर में दिखाई नहीं देते है। कई बार इसका पता तब चलता है जब हड्डी में फ्रैक्चर हो जाता है या हड्डियां बहुत कमजोर हो जाती हैं।


30 की उम्र में हड्डियां कमजोर होने के कारण 

30 की उम्र के बाद महिलाओं की हड्डियां वीक होने लगती है और ऐसा होने के कई कारण होते हैं। लेकिन सबसे बड़ा कारण महिलाओं में होने वाला हार्मोनल बदलाव है। खासकर महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन कम होना, यह हार्मोन हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में खास रोल निभाता है। इसके अलावा कुछ लाइफस्टाइल फैक्टर्स भी हड्डियों के नुकसान को बढ़ा सकते हैं, जैसे: 


कैल्शियम और विटामिन D की कमी

  • ज्यादा समय तक बैठे रहना या फिजिकल एक्टिविटी कम होना
  • धूम्रपान और ज्यादा शराब का सेवन
  • परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस की हिस्ट्री
  • बहुत कम बॉडी वेट या लो BMI


कब पता चलता है इसके बारे में?

यह सभी समस्या धीरे-धीरे और बिना लक्षण के बढ़ती है, इसलिए कई महिलाओं को इसके बारे में तब पता चलता है जब उनकी हड्डिय बहुत कमजोर हो चुकी होती हैं।


समय रहते करवाएं हड्डियों की जांच

डॉक्टरों के मुताबिक, हड्डियों की स्थिति जानने के लिए DEXA स्कैन करवाना काफी मदद कर सकता है। यह टेस्ट हड्डियों की घनत्व को मापता है और शुरुआती स्टेज में ऑस्टियोपोरोसिस का पता लगाने में मदद करता है।


हड्डियों को मजबूत रखने के लिए अपनाएं ये टिप्स

कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर डाइट लें- डाइट में दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, नट्स, फोर्टिफाइड फूड और फैटी फिश शामिल करें। क्योंकि हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम और विटामिन डी बेहद जरूरी हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट भी ले सकते हैं। 


नियमित एक्सरसाइज करें

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करती हैं। इसलिए रोजाना वॉक, योग, जॉगिंग या हल्की वेट ट्रेनिंग करें, इससे काफी फायदा मिल सकता है।


लिमिट में शराब और कैफीन लें

अधिक मात्रा में शराब और कैफीन लेने से शरीर में कैल्शियम का अवशोषण प्रभावित हो सकता है। इसलिए इनका सेवन सीमित मात्रा में करें।


धूम्रपान से दूरी बनाएं

स्मोकिंग हड्डियों को कमजोर करती है और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ा सकती है। इसलिए धूम्रपान छोड़ना हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी है।


स्ट्रेस को कंट्रोल करें

लंबे समय तक रहने वाला स्ट्रेस भी आपकी हड्डियों पर असर डाल सकता है, इसलिए जितना हो स्ट्रेस को खुद से दूर रखे। तनाव कम करने के लिए नियमित योग, मेडिटेशन और माइंडफुलनेस तकनीक अपनाएं। 


शुरुआती चेतावनी के संकेत (जिन्हें नजरअंदाज न करें)

  • यद्यपि यह साइलेंट है, लेकिन कुछ संकेत हड्डियों की कमजोरी की ओर इशारा कर सकते हैं:
  • पीठ या कमर में लगातार रहने वाला दर्द।
  • ऊंचाई (लंबाई) में कमी महसूस होना या शरीर का आगे की ओर झुकना (stooped posture)।
  • पकड़ (grip strength) का कमजोर होना।
  • मसूड़ों का पीछे हटना (हड्डियों के क्षय का संकेत)।

Thursday, March 5, 2026

मध्यप्रदेश पुलिस का शानदार प्रदर्शन, 06 पदक जीते: 44वीं अखिल भारतीय पुलिस घुड़सवारी प्रतियोगिता, डीजीपी श्री कैलाश मकवाणा ने विजेताओं को किया सम्मानित

मध्यप्रदेश पुलिस के घुड़सवारी दल ने 44वीं अखिल भारतीय पुलिस घुड़सवारी प्रतियोगिता एवं माउंटेड पुलिस ड्यूटी मीट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल 06 पदक (02 स्वर्ण , 02 रजत एवं 02 कांस्य) अर्जित कर मध्यप्रदेश पुलिस का गौरव बढ़ाया है। यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता 15 से 27 फरवरी 2026 तक सीमा सुरक्षा बल अकादमी, टेकनपुर में आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर की पुलिस एवं अर्द्धसैनिक बलों की 21 टीमों, 345 अश्वों और लगभग 700 राइडर्स ने भाग लिया।


इस उपलब्धि पर पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने विजेता खिलाड़ियों को पुलिस मुख्‍यालय भोपाल में मेडल पहना कर एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने टीम के जांबाज घुड़सवारों की सराहना करते हुए कहा कि यह सफलता न केवल टीम की कड़ी मेहनत और अनुशासन का परिणाम है, बल्कि यह मध्यप्रदेश पुलिस की पेशेवर दक्षता और उत्कृष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था का प्रमाण भी है।पुलिस महानिदेशक श्री मकवाणा ने सभी प्रतिभागियों को उचित इनाम देने की घोषणा की तथा भविष्य में और अधिक उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु निरंतर अभ्यास एवं उच्च स्तरीय प्रशिक्षण पर बल दिया।


प्रतियोगिता के अंतर्गत ‘सईस टेस्ट’ में उत्कृष्ट अश्व प्रबंधन का प्रदर्शन करते हुए श्री घनश्याम प्रजापति ने स्वर्ण पदक अर्जित किया। टीम के प्रमुख राइडर आरक्षक श्री फराज खान ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय देते हुए क्रॉस कंट्री स्पर्धा में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने पुलिस हॉर्स टेस्ट एवं क्रॉस कंट्री में दो रजत पदक तथा मेंटल हेजार्ड एवं शो जंपिंगग्रेड-03 स्पर्धाओं में दो कांस्य पदक हासिल किए। शो जंपिंग प्री प्रिलिमिनरी स्पर्धा में भी उन्होंने चौथा स्थान प्राप्त कर मध्‍यप्रदेश पुलिस का मान बढ़ाया।


पुलिस मुख्‍यालय में आयोजित सम्‍मान समारोह में राज्य की माउंटेड पुलिस इकाई को और अधिक पेशेवर बनाने, आधुनिक प्रशिक्षण एवं कोचिंग मॉडल अपनाने तथा उच्च नस्ल के स्पोर्ट्स ब्रीड अश्वों की संख्या में वृद्धि करने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया, ताकि आगामी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मध्य प्रदेश पुलिस और अधिक पदक अर्जित कर सके।


इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एसएएफ श्री चंचल शेखर, पुलिस महानिरीक्षक एसएएफ इंदौर रेंज श्री चंद्रशेखर सोलंकी, पुलिस महानिरीक्षक एसएएफ श्री इरशाद वली, डीआईजी आरएपीटीसी श्री धर्मेन्‍द्र सिंह भदौरिया, कमांडेंट 15वीं वाहिनी श्रीमती हितिका वासल, पर्यवेक्षक अधिकारी उप सेनानी श्रीमती प्राची द्विवेदी सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

होमोसिस्टीन क्यों बन रहा जानलेवा, अब सतर्क होना जरूरी

सीने में दर्द होने पर  39 वर्षीय मरीज निजी अस्पताल पहुंचा। ईसीजी और शुरुआती जांच सामान्य रहीं, लेकिन विस्तृत जांच में हार्ट की मांसपेशियों की कार्यक्षमता कमजोर और होमोसिस्टीन का स्तर काफी बढ़ा हुआ मिला। डॉक्टरों के अनुसार, इसी कारण धमनियों में थक्का बना और सीने में दर्द हुआ। इसी तरह 46 वर्षीय एक अन्य मरीज में भी हार्ट अटैक के बाद यही स्थिति पाई गई।

हर 10 में 8 मरीज विटामिन की कमी के शिकार

सरकारी और निजी अस्पतालों की कार्डियोलॉजी ओपीडी में आने वाले मरीजों की रिपोर्ट चौकाने वाली है। यहां हर 10 में से 8 मरीजों में विटामिन डी और बी12 की कमी पाई जा रही है। यही कमी होमोसिस्टीन बढ़ाकर दिल, दिमाग और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा रही है।

फिर विटामिन D और B12 की चर्चा क्यों जरूरी? 

चिकित्सकीय अध्ययनों में यह बार-बार सामने आया है कि विटामिन-डी की कमी हृदय की मांसपेशियों की कार्यक्षमता घटाती है। अतालता (अरिथिमिया) का जोखिम बढ़ाती है। होमोसिस्टीन बढ़ाती है। इससे धमनियों को नुकसान और अचानक हृदयघात का खतरा बढ़ता है।

यह अलार्म है, अब सतर्क होना जरूरी 

एक प्रसिद्ध अस्पताल के हृदय रोग डॉक्टर के अनुसार, 70 से 80% मरीजों में विटामिन D व B12 का स्तर सामान्य से काफी कम है। यह समस्या अब बुजुर्गों तक सीमित नहीं, बल्कि 22 से 45 वर्ष के युवाओं में बढ़ रही है।

होमोसिस्टीन क्यों बन रहा जानलेवा

डॉक्टर बताते कि होमोसिस्टीन की सामान्य सीमा से 15 माइक्रोमोल प्रति लीटर होती है। 50 से ऊपर पहुंचना बेहद खतरनाक है। हार्ट अटैक के करीब 60 प्रतिशत मामलों में इसका स्तर बढ़ा हुआ मिलता है।

नॉर्मल टेस्ट भी दे सकते हैं धोखा

डॉक्टर के अनुसार ECG, ECO और ट्रेडमिल टेस्ट तब ब्लॉकेज पकड़ते हैं, जब वह 80 प्रतिशत से अधिक हो। 20-30 प्रतिशत के 'वलनरेबल ब्लॉक' नॉर्मल दिखते हैं, लेकिन अचानक तनाव में फटकर कार्डियक अरेस्ट का कारण बन जाते हैं।

Wednesday, March 4, 2026

भारत और इंग्लैंड के बीच सेमीफाइनल 5 मार्च को

टीम इंडिया ने सुपर-8 के अंतिम मैच में वेस्टइंडीज पर बड़ी जीत दर्ज कर टी-20 विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है, जहां उसका सामना एक बार फिर इंग्लैंड से होगा। वानखेडे स्टेडियम में 5 मार्च को शाम 7 बजे से खेला जाने वाला यह मैच लगातार तीसरा सेमीफाइनल होगा, जहां दोनों टीमों की टक्कर होगी। इससे पहले 2012 में इंग्लैंड ने भारत को 10 विकेट से हराया था, जबकि 2024 में भारत ने 68 रनों में बदला लिया। अब घरेलू मैदान पर भारत की नजरें इंग्लैंड की फिर परास्त कर फाइनल में जगह बनाने पर होगी। इससे पहले टूनामेंट का पहला सेमीफाइनल 4 मार्च को दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच कोलकाता में खेला जाएगा। विश्व कप का दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला मारत और इंग्लैंड दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों ही टीमें दो-दो बार टी-20 विश्व कप जीत चुकी है। भारत 2007 और 2024 के रोपियन है, जबकि इंग्लैंड ने 2010 और 1022 में खिताब हासिल किया।


पुरुषों का टी-20 विश्व कप में भारत अब कुल छह बार सेमीफाइनल में पहुंच चुका है। 2007, 2014, 2016, 2022, 2024 और 2026 और इंग्लैंड भी छह संस्करणों में सेमीफाइनल तक पहुंचे हैं।


दोनों टीमों का टूर्नामेंट में सफर

भारतः  सूर्यकुमार यादव की अगुआई में भारतीय टीम का टी-20 विश्व कप में सफर शानदार रहा है। भारत ने में से 6 मैप जीते और 20वां आईसीसी सेमीफाइनल रिकॉर्ड बनाया। ग्रुप-ए में भारत ने सभी मैच बड़े अंतर से जीते। इसमें यूएसए को 29 रनों से, नामीबिया को 93 रनों से, पाकिस्तान को 61 रनों से और नीदरलैंड्स को 17 रूटों से हराकर ग्रुप टॉप किया। सुपर-8 में दक्षिण अफ्रीका से 76 रनों से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन जिम्वाच्चे को हराया और वेस्टइंडीज के खिलाफ आखिरी मैच में संजू सैमसन की नाबाद 97 रनों की पारी से 5 विकेट से जीत हासिल की।


इंग्लैंड: हेरी चूक की कप्तानी में इंग्लैंड का सफर भी उतार-चढ़ाव भरा रहा। ग्रुप चरण में नेपाल को 4 रनों से हराया, लेकिन वेस्टइंडीज से 30 रनों से हारे। फिर स्कॉटलैंड और इटली को हराकर सुपर-8 में जगह बनाई। सुपर-6 में श्रीलंका को 51 रनों से, पाकिस्तान की हराया (उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन) और न्यूजीलैंड को 4 विकेट से मात दी, जहां बिल जैक्स और रेहान अहमद की देर रात की पार्टी निर्णायक साबित हुई। इंग्लैंड ने भी 7 में से 6 मैच जीते, लेकिन वे कभी परफेक्ट गेम नहीं खेल सके, जैसा कि जैक्स ने खुद कहा।


टी-20 विश्व कप में भारत बनाम इंग्लैंड मैच

  • 2007-ग्रुप स्टेज-भारत ने इंग्लैंड को 18 रन से हराया
  • 2009-सुपर 8-इंग्लैंड ने भारत को तीन रन से हराया
  • 2012-ग्रुप स्टेज-भारत ने इंग्लैंड को 90 रन से हराया
  • 2022-सेमीफाइनल-इंग्लैंड ने भारत को 10 विकेट से हराया
  • 2024-सेमीफाइनल-भारत ने इंग्लैंड को 68 रन से हराया


वानखेड़े में रिकॉर्ड

वानखेड़े स्टेडियम मुम्बई का एक प्रमुख खेल का मैदान हैं। यहां 16 टी-20 इंटरनेशनल में 8 बार चेज करने वाली टीमों और 8 ही बार पहले बैटिंग करने वाली टीमों को जीत मिली।

254 रन इस मैदान का सबसे बड़ा स्कोर है, जो वेस्टइंडीज ने इसी वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ बनाया। यहां 32 पारियों में 6 बार 200 प्लस के स्कोर बन चुके हैं। इंग्लैंड की टीम ही 2025 में भारत के खिलाफ 97 रन पर ऑलआउट भी हो चुकी है।

भारत ने इस मैदान पर 71% टी-20 जीते हैं, लेकिन सेमीफाइनल में टीम का रिकॉर्ड कुछ खास नहीं रहा। टीम इंडिया ने यहां मल्टिनेशनल टूर्नामेंट के 4 सेमीफाइनल खेले और महज 1 जीता। वानखेड़े स्टेडियम में दोनों टीमें इस फॉर्मेंट में दो बार भिड़ चुकी हैं। दोनों टीमों ने एक-एक मैच जीता है। 2012 में इंग्लैंड में विकेट से मैच जीता था। 13 साल बाद फिर दोनों टीमें इस मैदान पर 2025 में आमने-सामने रही, जिसमें भारत में पिछला हिसाब चुकता करते हुए 150 रन से बड़ी जीत दर्ज की। 


खिलाड़ियों के बीच टक्कर

  • सूर्यकुमार यादव (359 रखें, 153,41 एसआर) स्पिन को अच्छा खेलते हैं, लेकिन रशीद खान की लेग स्पिन चुनौती दे सकती है।
  • जसप्रीत बुमराह की नई गेंद से शुरुआती विकेट लेने की क्षमता इंग्लैंड के ओपनर्स को परेशान कर सकती है। जोस बटलर या फिल साल्ट के लिए यह चुनौती हो सकती है।
  • इंग्लैंड के कप्तान हेटरी बूक स्पिन खेलने में माहिर हैं, लेकिन कुलदीप की चाइनामैन गेंदें गेम चेंजर हो सकती हैं।
  • अभिषेक शर्मा की स्पिन खिलाफ कमजोरी आत्मविश्वास) इंग्लैंड के लिए फायदेमंद हो सकती है, जहां विल जैक्स (ऑलराउंडर, 4 प्लेयर ऑफ मैच) और लियाम डॉसन जैसे रिपॉन् असवार साबित हो सकते हैं।
  • जोझा आर्चर की पेस भारतीय ओपनर्स को शुरुआती झटका के सकती है। इशान किशन (355 रन, 200.56 एसआर) और शिवम दुबे की पावर हिंटिंग इंग्लैंड के लिए खतरा है. जबकि सैम कुरेन की डेथ ओवर बॉलिंग भारत को रोक सकती है।

Tuesday, February 17, 2026

पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने जिला स्तरीय प्रतियोगिता आयोजन

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभागमध्य प्रदेश शासन से प्राप्त निर्देशानुसार कलेक्टरडॉ. गिरीश कुमार मिश्रा एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारीजिला पंचायत डॉ. इच्छित गढ़पाले के मार्गदर्शन में नवाचार अंतर्गत पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले में जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता का संयोजन खेल एवं युवा कल्याण विभाग  राजगढ़ द्वारा किया जा रहा है। प्रतियोगिता के अंतर्गत बालक वर्ग में कबड्डी एवं बालिका वर्ग में खो-खो खेल का आयोजन किया गया।जिसमें जनपद स्तर से चयनित टीमों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में जनपद क्षेत्र की 7 पंचायतों के खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।


जिला स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली टीमों को 21 हजार रूपये, 11 हजार रूपये एवं 5 हजार रूपयेकी नगद पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। कार्यक्रम का शुभारंभ उपसंचालक संभागीय खेल एवं युवा कल्‍याण अधिकारी श्रीमती शर्मीला डाबर द्वारा किया गया। संभागीय खेल अधिकारी श्रीमती डाबर द्वारा बताया गया कि भारत की पारंपरिक खेल विधाएँ हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन खेलों के माध्यम से खिलाड़ियों में शारीरिक क्षमता, अनुशासन, आत्मविश्वास एवं टीम भावना का विकास होता है। उन्होंने कहा कि जनपद स्तर से प्रतिभाओं को आगे बढ़ाकर जिला एवं राज्य स्तर तक मंच प्रदान करना विभाग की प्राथमिकता है। प्रतियोगिता के सफल संचालन में क्रीड़ा शिक्षक श्री अरविंद बंसल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके मार्गदर्शन में खिलाड़ियों ने खेल भावना के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

mpmygov.in पोर्टल के माध्यम से कम्पनी के लोगो (Logo) निर्माण हेतु ऑनलाइन प्रतियोगिता

 नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से https://mpmygov.in पोर्टल के माध्यम से कम्पनी के लोगो (Logo) निर्माण हेतु ऑनलाइन प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है।


इस प्रतियोगिता का उद्देश्य रचनात्मक प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना तथा कम्पनी की पहचान को मजबूत बनाना है। इसमें भाग लेकर नागरिक अपनी रचनात्मक सोच और डिजाइन कौशल प्रदर्शित कर सकते हैं। प्रतियोगिता में चयनित सर्वश्रेष्ठ लोगो को 25 हजार रूपये का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इच्छुक नागरिक पोर्टल पर दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार अपनी प्रविष्टियाँ ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।

Friday, February 13, 2026

रफत उल्ला खॉन का सिविल सर्विस हॉकी प्रतियोगिता में चयन

केन्द्रीय सिविल सेवा सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा बोर्ड, नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित भारतीय सिविल सेवा हॉकी (पुरुष) प्रतियोगिता 2025-26 में सीहोर के श्री रफत उल्ला खॉन का चयन मध्यप्रदेश सिविल सर्विस टीम में हुआ है। यह प्रतियोगिता 17 फरवरी 2026 से 28 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित की जा रही है।


श्री रफत उल्ला खॉन वर्तमान में जिला चिकित्सालय सीहोर में पदस्थ हैं। उनके चयन पर जिला चिकित्सालय परिवार में हर्ष का माहौल है। उल्लेखनीय है कि श्री रफत उल्ला खॉन पूर्व में भी विभिन्न सिविल सर्विस प्रतियोगिताओं में सहभागिता कर प्रदेश का नाम रोशन कर चुके हैं। सिविल सर्जन डॉ. उमेश श्रीवास्तव, आरएमओ डॉ. सुधीर श्रीवास्तव, सहित अनेक डाक्टर्स एवं स्टॉफ ने शुभकामनाएं दी हैं।




Thursday, February 12, 2026

T20 World Cup 2026: श्रीलंका ग्रुप-बी प्वांइट टेबल में टॉप पर

Sports, Cricket | पल्लेकेले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में टी20 विश्व कप 2026 के ग्रुप बी के मुकाबले में श्रीलंका ने ओमान को 105 रन से हरा दिया। श्रीलंका की यह दूसरी जीत है।


226 रन के बड़े लक्ष्य के दबाव में ओमान की बल्लेबाजी बिखर गई। टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और 12 के स्कोर पर दोनों सलामी बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे। तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आए हम्माद मिर्जा भी 9 रन बनाकर आउट हो गए।


चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आए मोहम्मद नदीम और पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आए वसीम अली ने क्रीज पर रुकने का साहस दिखाया और चौथे विकेट के लिए पारी की सबसे बड़ी 42 रन की साझेदारी की। वसीम 20 गेंद पर 3 छक्कों की मदद से 27 रन बनाकर आउट हुए। नदीम 56 गेंद में 3 चौकों और 1 छक्के की मदद से 53 रन बनाकर नाबाद रहे। इन दोनों बल्लेबाजों को छोड़कर कोई भी अन्य बल्लेबाज दो अंकों में प्रवेश नहीं कर सका।


ओमान 20 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर 120 रन बना सकी और 105 रन के बड़े अंतर से मैच हार गई।


दुश्मंथा चमीरा ने 2 ओवर में 19 रन देकर 2, महिश तिक्षाणा ने 4 ओवर में 11 रन देकर 2, दुनिथ वेलालागे ने 4 ओवर में 17 रन देकर 1, दुशन हेमंथा ने 4 ओवर में 45 रन देकर 1, कामिंदु मेंडिस ने 2 ओवर में 10 रन देकर 1 विकेट लिए।


इसके पहले ओमान ने टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला किया था। पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका ने खराब शुरुआत के बावजूद 5 विकेट पर 225 रन बनाए थे। श्रीलंका की तरफ से कप्तान दासुन शनाका ने मात्र 19 गेंद पर 5 छक्कों और 2 चौकों की मदद से 50 रन की पारी खेली। अंतरराष्ट्रीय टी20 में श्रीलंका की तरफ से यह सबसे तेज अर्धशतक है। शनाका के अलावा, पवन रथनायके ने 28 गेंद पर 1 छक्का और 8 चौकों की मदद से 60 रन और कुसाल मेंडिस ने भी 45 गेंद पर 7 चौकों की मदद से 61 रन की पारी खेली।पल्लेकेले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में टी20 विश्व कप 2026 के ग्रुप बी के मुकाबले में श्रीलंका ने ओमान को 105 रन से हरा दिया। श्रीलंका की यह दूसरी जीत है।


226 रन के बड़े लक्ष्य के दबाव में ओमान की बल्लेबाजी बिखर गई। टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और 12 के स्कोर पर दोनों सलामी बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे। तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आए हम्माद मिर्जा भी 9 रन बनाकर आउट हो गए।


चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आए मोहम्मद नदीम और पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आए वसीम अली ने क्रीज पर रुकने का साहस दिखाया और चौथे विकेट के लिए पारी की सबसे बड़ी 42 रन की साझेदारी की। वसीम 20 गेंद पर 3 छक्कों की मदद से 27 रन बनाकर आउट हुए। नदीम 56 गेंद में 3 चौकों और 1 छक्के की मदद से 53 रन बनाकर नाबाद रहे। इन दोनों बल्लेबाजों को छोड़कर कोई भी अन्य बल्लेबाज दो अंकों में प्रवेश नहीं कर सका।


ओमान 20 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर 120 रन बना सकी और 105 रन के बड़े अंतर से मैच हार गई।


दुश्मंथा चमीरा ने 2 ओवर में 19 रन देकर 2, महिश तिक्षाणा ने 4 ओवर में 11 रन देकर 2, दुनिथ वेलालागे ने 4 ओवर में 17 रन देकर 1, दुशन हेमंथा ने 4 ओवर में 45 रन देकर 1, कामिंदु मेंडिस ने 2 ओवर में 10 रन देकर 1 विकेट लिए।


इसके पहले ओमान ने टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला किया था। पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका ने खराब शुरुआत के बावजूद 5 विकेट पर 225 रन बनाए थे। श्रीलंका की तरफ से कप्तान दासुन शनाका ने मात्र 19 गेंद पर 5 छक्कों और 2 चौकों की मदद से 50 रन की पारी खेली। अंतरराष्ट्रीय टी20 में श्रीलंका की तरफ से यह सबसे तेज अर्धशतक है। शनाका के अलावा, पवन रथनायके ने 28 गेंद पर 1 छक्का और 8 चौकों की मदद से 60 रन और कुसाल मेंडिस ने भी 45 गेंद पर 7 चौकों की मदद से 61 रन की पारी खेली।

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